बस्ती। महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचन्द्र की जयंती के अवसर पर दारुल उलूम इस्लामिया फैजाने आलम, दमया परसा में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रिंसिपल सूफी एजाज आलम खान कादरी ने विद्यार्थियों को मुंशी प्रेमचन्द्र के जीवन और उनकी अमर रचनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
अपने संबोधन में सूफी एजाज आलम खान कादरी ने मुंशी प्रेमचन्द्र द्वारा लिखित प्रसिद्ध कहानी "ईदगाह" का सारांश सुनाते हुए बच्चों को उसके नैतिक संदेश से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि कहानी का मुख्य पात्र हामिद ईद के मेले में अपने लिए न तो कोई खिलौना खरीदता है, न मिठाई खाता है और न ही झूले का आनंद लेता है। वह अपनी बूढ़ी दादी आमिना की तकलीफ को समझते हुए उनके लिए एक चिमटा खरीदता है, क्योंकि रोटी बनाते समय उनकी उंगलियां अक्सर जल जाती थीं।
सूफी साहब ने कहा कि हामिद का यह त्याग, प्रेम और संवेदनशीलता हम सभी के लिए एक मिसाल है। यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची खुशी केवल अपनी इच्छाओं को पूरा करने में नहीं, बल्कि अपने माता-पिता और बड़ों की सेवा तथा उनकी खुशियों का ध्यान रखने में है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में प्रेम, करुणा, त्याग और सम्मान जैसे गुणों को अपनाएं तथा अपने माता-पिता और शिक्षकों का आदर करें। कार्यक्रम के अंत में बच्चों ने मुंशी प्रेमचन्द्र की रचनाओं से प्रेरणा लेकर समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करने का संकल्प लिया।
सीख: "ईदगाह" केवल एक कहानी नहीं, बल्कि त्याग, प्रेम और परिवार के प्रति समर्पण का ऐसा संदेश है, जो बच्चों को निस्वार्थ भाव से अपने बड़ों की सेवा करने की प्रेरणा देता है।
ब्यूरो रिपोर्ट
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